Adhuure Alfaaz | अधूरे अलफ़ाज़


 

            परछाइयाँ

वीरां गुलिस्तां, उजड़े दरख़्त. खामोश परिंदे

अजनबी सी लगती हैं अब ये दर ओ दीवार,

बोझल साँसे, जिस्म सर्द, अल्फ़ाज़ नश्तर,

निगाहें अंगारे, बयाबान-ए-यास सब कटरे,

 मोहल्ले, चौखट, चौबारे, तंग गलियाँ,

वहशी सन्नाटे, बंद खिड़कियों मे गिरफ्ता

ख़ौफ़-ज़दा चेहरे, बे ख़्वाब, बेनूर हैं सारे नज़ारे,

फ़ज़ा-ए-ग़म में सिसकती है ख़ूँ-रेज़ रूह इस शहर की  

नफरतों की जंग ने जिसे रातों रात बेवा कर दिया

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

ख़ुसरो तेरी तंग गलिओं की महक में उल्झा है यूँ दिल मेरा 
के अब तेरे दर पे आके ही होगी मुक़म्मल मेरी ये नज़्म-ए-ज़िन्दगी

~~~~~~~~~~~~~~~~~~

एक अरसे से हूँ क़ैद इसी आईने में

अब तेरे अक्स में घुल जाऊं तो रिहा हो जाऊं

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

अक्स

उभरते हैं कुछ अक्स आईने में हर रोज़,

ताकते रहते हैं बेबस से खामोश दीवारों को,

धुंधले, कभी साफ़, कभी खोए खोये से

जैसे के हों किसी ख्वाब में तैरते कोई ख्वाब,

या किसी ना-मुकम्मल दास्ताँ

का इक़्तिबास, या फिर कोई चाह

असीर चंद लफ़्ज़ों में, वो राज़ ए निहाँ,

वो भूले से नग्मात, वो माशूक चेहरे

वो मख़मूर रातें, वो आबरू के दायरे,

वो मज़हब की कटारें, वो दाग़ – ऐे – तन्हाई

वो गिरहें, जाल फरेब निगाहें, वो ख़्वाब

जिनकी ग़ैर-मुमकिन थी तकमील, इन्हीं

अक्सों के सियह सायों में रेज़ा रेज़ा मेरा भी

अक्स  डोलता है बंजारा सा,  बे रंग, बे नूर,

आइना गिरफ़्त सदियों से

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

अधूरे अलफ़ाज़

मुफ़लिसी ऐसी के ग़म भी लेने पड़े उधार
क्या कहेँ किस क़दर क़र्ज़ में डूबा है
गुलशन का कारोबार

आलम ये है के महफिलें अधूरी पल अधूरे अधूरे से सब अल्फाज़
सुकूं अधूरा वफा अधूरी सितम् अधूरे शिक़वे अधूरे अधूरे हैं हर साज़
तमन्ना अधुरी अरमां अधूरे गीत अधूरे रह गयी अधूरी शौक़ मुलाक़ात की रात
रहने दो क्या बताएं हाल दिल तुमको मेरे दिलबर मेरे ग़मगुसार
खामोशी तुम समझोगे नहीं और बयां हमसे होगा नहीं

Advertisements

6 thoughts on “Adhuure Alfaaz | अधूरे अलफ़ाज़

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s