Aao phir kuch pyar ki baat Karen


आओ फिर कुछ प्यार की बात करें
वो प्यार जो कभी
मेरे और तुम्हारे बीच था
उन् बारिश से भीगी हुई
शामों का ज़िक्र करें

या फिर उन् तारों भरी रातों का
उन् सपनो का जो हमने
मिलकर थे बुने
या फिर डूबते सूरज से
रंगीन शामों का

और वो प्रेम की रातों में
जुगनुओं का चमकना याद करें

आओ बात करें उन चाहतों की,
उन् ख्वाहिशों की
उन् सर्द रातों की
जो तुम्हारी तपिश से
गरमा उठ्ठी थी

जब रुई से बर्फ के टुकडों
के साथ पंख लगा
हमारे मन् युहीं दूर
कहीं उड़ जाते थे

आओ बात करें
तुम्हारी उन् नटखट नशीली आँखों की
भीगे हुए सुर्ख हसीं लबों की
या फिर कानों में दबी सि आवाज़ में
तुम्हारी प्यार भरी बातों की

और हजारो दीपकों सी जगमाती
हसरतों की जिनकी रंगत से
तेरे गालो पे आ जाती थी लाली

उन् दहकते जिंसों की
उन् महकती रातों की
जो तेरे आगोश में
गुज़रीं थी कभी

आज उन् बिखरी हुई यादों के
मलबे में से
तुम्हारे कुछ ख्वाब
निकल के आयें हैं
आज फिर मुझको
दो घड़ी
तुम्हारी आगोश में
समाने का लुफ्त मिला है.

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