Teri Yaad Sath hai …


यादों के धुंधले गलियारों में से
तेरी याद के साये ने दस्तक दी फिर
कुछ अधूरे पल
कुछ नगमे जिन्हें सुरों में बंधा था हमने
वो गीत वो लबों पर ठहरे रह गए
कुछ एहसास, चंद घडियां
जो तेरे साथ गुज़रीं थी
कुछ खतों के पन्नों की तरह
आँखों में नमी बनकर बस गयी
मुक्त होगये तुम सभी बन्धनों से
चले गए एक दूसरी ही दुनिया में
पर जाते हुए शायद
मेरी रूह का एक हिस्सा भी ले गए
पथराई आँखों में आंसू भी आने ने घबरा रहे हैं
शायद डरते हैं के कहीं
तुम्हारी तस्वीर भीग ना जाये
दिल की देहलीज़ पर रुके है
दर्द के बादल बरस जाने को,
तुमसे वादा था मिलने का एक दिन
पूरे करने थे वो अधूरे ख्वाब
जो बरसों से मन् की गहरायिओं में दफ़्न थे
पर पूरे चाँद की ये रात एक
अमावस की काली चादर उढा गयी
अब तेरी रूह से उलझी हूई है मेरी जां
और तेरी यादों से मेरे दिल के जुड़े हैं तार
हर वक़्त तू है करीब तेरा एहसास तेरी खुशबू
तेरी सांसों की गर्माहट
जिस्म को छोड़ रूह तेरी आजाद हूई
अब तो कोई बंधन नहीं कोई रिश्तों की डोर नहीं
कोई दीवार नहीं ना डर है अब
ज़माने की रुसवाई का
है तू मेरी जिस्म ओ जां का हिस्सा
मेरी रगों मी बहते लहू का रंग
मेरी तनहाइयों का हमदम
मेरे हर पल का मीत
है मुश्किल अब जुदा करना तुझे मुझसे
शायद आ गया है वक़्त उन अधूरे पलों
की खाली जगहों को भरने का

7 thoughts on “Teri Yaad Sath hai …

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