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Archive for the ‘Kuch Qatare Jeevan Se... Hindi poems and articles’ Category

बन कर घटा यूँ आसमा पर
आखों का काजल छा गया
आज जो बरसे नयन तो
भीगे का सारा आलम साथ में |
खुली जो आँख तो हर हसरत
उठी जाग मन् की
मगर अफ़सोस खो दिया उसको भी
पाया था जिसको ख्वाब में |
दिन भर गुज़र गया
खुद के टुकड़े चुनते हुए
चली जो शाम – ए – गम [...]

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वो सराब था के हकीकत
मालूम नहीं
मेरा जुनून था या के कोई ख्वाब
मालूम नहीं
सेहरा की तपती रेत पर थे
उसके क़दमों के निशां
और फलक पर आंच थी [...]

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तुझे देखा है
भोर की सुनहरी धुप की किरणों में
अलसाये हुए अधखुले फूलों में
बारिश से नम् पत्तों पे ओस की बूंदों में
पंछियों की चहचाहट में
अल्हड नदी की इठलाती लहरौ में
डूबते सूरज से रंगीन शामों में
और रेशमी रातों के अंधेरों में
तुझे देखा है
कई बार आईने से झाकते अपने ही [...]

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आज फिर शाख से सुनहरे पत्तों को
ज़मीं पर बरसते देखा
फिर तेरी याद के साये में
एक दिन को गुज़रते देखा
हवाओं की सरसराहट में सुनी फिर
तेरे गीतों की धुन
और फिर शाम के गहराते सायों में
गम की एक बद्ली सी उठी
आज फिर [...]

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आओ फिर कुछ प्यार की बात करें
वो प्यार जो कभी
मेरे और तुम्हारे बीच था
उन् बारिश से भीगी हुई
शामों का ज़िक्र करें
या फिर उन् तारों भरी रातों का
उन् सपनो का जो हमने
मिलकर थे बुने
या फिर डूबते सूरज से
रंगीन शामों का
और वो [...]

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फीर हुईं अश्क से नम् आँखें मेरी
फीर उठा दर्द आज सीने में
फीर तेरी याद सीने से लगाये
ढूढ़ते रहे हम तुझे शाम के
बेनूर अंधेरों में
तनहा थी मैं जब तक
तुम ना मीलेे थे
फीर तुम मिले , गम मीले ,
और इक कारवां सा बन गया
ओस से भीगी है रात कि अश्कों से
कर रहें [...]

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यादों के धुंधले गलियारों में से
तेरी याद के साये ने दस्तक दी फिर
कुछ अधूरे पल
कुछ नगमे जिन्हें सुरों में बंधा था हमने
वो गीत वो लबों पर ठहरे रह गए
कुछ एहसास, चंद घडियां
जो तेरे साथ गुज़रीं थी
कुछ खतों के पन्नों की तरह
आँखों में नमी बनकर बस गयी
मुक्त होगये तुम सभी बन्धनों [...]

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शाम
आज शाम कुछ सायों से मुलाक़ात हूई
शायद पुरानी यादें थी, साथ हो लीं
पेड़ों के झुरमुट में पत्तो की सरसराहट ने
हौले से कुछ कहा
दूर पहाड़ी पे मंदिर के
घंटे की आवाज़
और बसेरों पे लौटते हुए
पंछियों का कोलाहल
खामोश रास्तों पर कुछ पहचाने से लम्हे
तेरे दीदार के इन्तेज़ार में नज़रें बिछाये
सूनी स्याह राहों [...]

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भोर
कुछ आधे अधूरे ख्वाब
अपनी अलसाई आँखों मी समेटे
सूरज की पहली किरणों की चादर ओढे हुए
बिस्तर की सिलवटों में है
एक जिस्म करवटें ले रहा
तकिये पे शाम के बादलों के साए हैं
लिपटे हुए
नर्म गुलाबी होंठ जैसे ओस से भीगे गुलाब
और गालों पे लालिमा भोर के आकाश सी
हाथों की उँगलियाँ थामे है
डोर रेशमी प्रेम की
और पैरों [...]

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एक दिन ज़िन्दगी के नाम
दूर कहीं कोयल की कूक गोपी के कानों में पड़ी तो अपनी अलसाई अधखुली आँखों से , अंगडाई लेते हुए, उसने एक नज़र अपने चारों तरफ देखा और एक हलकी सी मुस्कराहट होंटों पे लिए चादर तान के फिर आँखें बंद कर लीं |
ठंडी हवा के झोके [...]

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